डबल इंजन की जुगलबंदी से उत्तर प्रदेश में समाजवाद के खोखले वादों पर भारी पड़ा मोदी-योगी का सुशासन मॉडल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के ऐतिहासिक कार्यकाल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दृढ़ संकल्प से उत्तर प्रदेश का कायाकल्प हो चुका है। 'डबल इंजन' सरकार के बेजोड़ नीतिगत समन्वय, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और एक्सप्रेसवे-एयरपोर्ट्स के बिछते जाल ने समाजवाद के खोखले वादों को पीछे छोड़कर सूबे को देश की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बना दिया है।


डबल इंजन की जुगलबंदी से उत्तर प्रदेश में समाजवाद के खोखले वादों पर भारी पड़ा मोदी-योगी का सुशासन मॉडल

भारतीय राजनीति के फलक पर 10 जून 2026 की तारीख लोकतांत्रिक इतिहास के एक स्वर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 4,399 दिन पूरे कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के सर्वाधिक समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के शानदार 12 वर्ष पूरे होने के इस पड़ाव पर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के कायाकल्प का विश्लेषण करना नितांत प्रासंगिक है। उत्तर प्रदेश नेहरू और इंदिरा गांधी जैसी शख्सियतों का गृह राज्य और राजनीतिक कर्मभूमि रहा है, लेकिन विकास की जिस 'लैबोरेट्री' (प्रयोगशाला) के रूप में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देखा, वैसा दृष्टिकोण पहले कभी नहीं अपनाया गया। आज जब उत्तर प्रदेश देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है, तो यह यक्ष प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह अभूतपूर्व रूपांतरण पहले क्यों नहीं हुआ? क्या अतीत में इच्छाशक्ति का अभाव था या केंद्रीय नीतियों से सामंजस्य बैठाने में तत्कालीन नेतृत्व पूरी तरह नाकाम रहा?

यही वह ऐतिहासिक बिंदु है जहां दूरदर्शी प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्रीय विजन को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक संकल्पित 'कर्मयोगी' के रूप में सामने आते हैं। वर्ष 2014 में जब देश की कमान प्रधानमंत्री मोदी ने संभाली, तब शुरुआती तीन वर्षों तक उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। उस दौर की कड़वी सच्चाई किसी से छिपी नहीं है कि तत्कालीन राज्य नेतृत्व ने तुष्टीकरण और राजनीतिक द्वेष के चलते केंद्र की उन जनकल्याणकारी योजनाओं को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया, जो सीधे तौर पर गरीबों के जीवन को बदल सकती थीं। केंद्र से भेजे जाने वाले पैसों का सदुपयोग करने के बजाय फाइलों को अटकाना और भटकाना ही तत्कालीन सरकार की नियति बन चुकी थी।

वर्ष 2017 में जब उत्तर प्रदेश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत देकर योगी आदित्यनाथ को सूबे की कमान सौंपी, तब विकास के इस अवरोधक का अंत हुआ। मोदी के विजन को योगी ने केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं माना, बल्कि उसे जन-जन के जीवन का मिशन बना दिया। केंद्र की योजना और राज्य का अचूक क्रियान्वयन—यही वह 'डबल इंजन' का समन्वय है, जिसने राज्य में असाधारण परिणाम पैदा किए। 2017 से पहले का उत्तर प्रदेश माफिया राज, संगठित अपराध, जातिगत दंगों, बदहाल सड़कों और उद्योगों के पलायन के लिए बदनाम था। निवेशक यहां आने के नाम से कतराते थे और राज्य की युवा प्रतिभाएं दिल्ली-मुंबई भागने को मजबूर थीं। सुरक्षा के अभाव में कोई भी राज्य आर्थिक उन्नति नहीं कर सकता, इस मूलमंत्र को समझते हुए मुख्यमंत्री योगी ने सबसे पहले कानून का राज स्थापित किया। अपराधियों पर कड़ा शिकंजा कसा गया, जिससे सूबे में भयमुक्त वातावरण का निर्माण हुआ और विकास की पहली अनिवार्य शर्त पूरी हुई।

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश की अनगिनत यात्राएं कर हर बार विकास की नई इबारत लिखी है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिक अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का ऐसा बेजोड़ संगम पहले कभी नहीं देखा गया। दिसंबर 2021 में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का भव्य लोकार्पण भारत की सनातन आत्मा की पुनर्प्रतिष्ठा का क्षण था। इसके बाद, जनवरी 2024 में अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा ने सदियों की प्रतीक्षा को विराम दिया। आज अयोध्या सिर्फ एक धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, चौड़ी सड़कों, आलीशान होटलों और आधुनिक घाटों के साथ एक वैश्विक पर्यटन अर्थव्यवस्था के रूप में चमक रही है। यही तर्ज मथुरा, वृंदावन और विंध्यधाम के विकास में भी दिखाई देती है, जहां आस्था और रोजगार साथ-साथ फल-फूल रहे हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश में आई क्रांति किसी चमत्कार से कम नहीं है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे जैसे विशाल राजमार्गों ने न केवल शहरों की दूरियां घटाई हैं, बल्कि सदियों से उपेक्षित पड़े अंचलों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर वायुसेना के लड़ाकू विमानों की लैंडिंग कराकर प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया था कि ये सड़कें केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रणनीतिक संपत्ति हैं। इसके साथ ही लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो रेल का जाल बिछाकर शहरी परिवहन को पूरी तरह आधुनिक रूप दे दिया गया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में गोरखपुर और रायबरेली के एम्स सहित दर्जनों नए मेडिकल कॉलेजों ने उस बहुत बड़ी रिक्तता को भर दिया है, जिसके कारण कभी पूर्वी उत्तर प्रदेश के गरीबों को इलाज के लिए दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती थी।

विमानन क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने जो छलांग लगाई है, वह चकित करने वाली है। कुशीनगर, अयोध्या और नोएडा (जेवर) के रूप में राज्य को तीन नए शानदार अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट मिले हैं। जेवर में बन रहा नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा तो एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार होने जा रहा है, जो अकेले लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा कर दिल्ली-एनसीआर के आर्थिक भूगोल को बदल रहा है। कभी देश की सुरक्षा के लिए हथियारों के आयात पर निर्भर रहने वाला भारत अब उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड और आगरा-लखनऊ रक्षा गलियारे (डिफेंस कॉरिडोर) में स्वदेशी मिसाइलें और टैंक बनते देख रहा है। यह रक्षा कॉरिडोर प्रधानमंत्री मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को जमीनी हकीकत में बदल रहा है। आज राज्य में डेटा सेंटर, बड़े टेक्सटाइल पार्क, फार्मा क्लस्टर और फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की बाढ़ आ गई है, जिसका मुख्य श्रेय कानून-व्यवस्था पर निवेशकों के उस अटूट विश्वास को जाता है जो मोदी-योगी की जोड़ी ने मिलकर अर्जित किया है।

वैश्विक स्तर पर भारत आज दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जिसमें घरेलू विकास दर औसतन 7 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है। इस विकास गाथा के मूल में 'अंत्योदय' यानी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का कल्याण है। आंकड़ों की जुबानी देखें तो सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश आज देश में शीर्ष स्थान पर है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सर्वाधिक 65 लाख से अधिक पक्के मकान अकेले उत्तर प्रदेश के गरीबों को मिले हैं। उज्ज्वला योजना के माध्यम से राज्य की करीब 2 करोड़ गरीब माताओं-बहनो को चूल्हे के जहरीले धुएं से हमेशा के लिए मुक्ति मिली है। 'हर घर जल' मिशन के तहत गांवों की देहरी तक शुद्ध पेयजल का नल पहुंच चुका है, जिससे संक्रामक बीमारियों पर भारी लगाम लगी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए करोड़ों अन्नदाताओं के खातों में सीधे भेजी जा रही सम्मान राशि उनका बड़ा संबल बनी है। वहीं, मुफ्त राशन योजना के जरिए राज्य के करीब 15 करोड़ जरूरतमंद लोगों को निरंतर खाद्य सुरक्षा की गारंटी मिल रही है। नीति आयोग की रिपोर्टों के अनुसार, देश में पिछले वर्षों के दौरान जो 25 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, उनमें एक बहुत बड़ी हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश के नागरिकों की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व और 12 वर्षों के इस ऐतिहासिक कार्यकाल ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि नियत साफ हो और नीति स्पष्ट हो, तो दशकों की बदहाली को चंद वर्षों में सुशासन में बदला जा सकता है। प्रधानमंत्री ने विकास का जो खाका खींचा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी प्रशासनिक कर्मठता से उसे पूरी निष्ठा के साथ जमीन पर उतार दिया। यही कारण है कि आज देश का यह हृदय प्रदेश अपनी खोई हुई सांस्कृतिक और आर्थिक महिमा को पुनः प्राप्त कर चुका है। तुष्टीकरण और जातिवाद की राजनीति को पीछे छोड़कर उत्तर प्रदेश अब पूरी तरह से विकासवाद की राह पर दौड़ रहा है। सूबे के नवनिर्माण की यह गौरवशाली यात्रा निरंतर जारी है और इसमें कोई संशय नहीं है कि आने वाले समय में 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश ही देश का सबसे मजबूत आधार स्तंभ सिद्ध होगा।

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