ट्रंप का भारत राग क्या है इस जुनून की वजह?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों से चर्चा में हैं। इस बार उनका निशाना है भारत और हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। 27 अगस्त 2025 को व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने दावा ठोका कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच चला चार दिन का युद्ध उन्होंने अपनी चतुराई से रुकवाया। उनके मुताबिक, उन्होंने मोदी जी Patient: जी को व्यापार समझौता रद्द करने की धमकी दी और पाकिस्तान को इतने ऊंचे टैरिफ की चेतावनी दी कि उनका सिर चकरा जाए। ट्रंप का कहना है कि उनकी धमकी के महज पांच घंटे बाद ही जंग थम गई। यह बात कोई नई नहीं। पिछले 100 दिन में ट्रंप ने 40 बार से ज्यादा यही दावा दोहराया है। भारत और मोदी का नाम बार-बार लेना उनके जुनून को दिखाता है, मानो वे भारत को भूल ही न पा रहे हों।
क्या हुआ था ऑपरेशन सिंदूर में?
मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। 7 मई को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इसमें पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए गए। भारत ने कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ जरूरी कदम था, तो पाकिस्तान ने इसका कड़ा विरोध किया। चार दिन बाद युद्धविराम हो गया, लेकिन ट्रंप ने इसका पूरा श्रेय खुद को दे डाला। 10 मई से 26 अगस्त तक उन्होंने व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ्रेंस, ट्रुथ सोशल पोस्ट और विदेशी नेताओं से मुलाकात में इसकी चर्चा की। कभी भारत-पाक तनाव को 1500 साल पुराना बताया, तो कभी सैकड़ों साल पुराना। ये दावे ऐतिहासिक रूप से गलत हैं। ट्रंप का यह कहना कि सात जेट्स गिराए गए, भारत और पाकिस्तान दोनों ने खारिज कर दिया।
टैरिफ की मार और भारत का जवाब
ट्रंप का भारत पर ध्यान सिर्फ युद्धविराम तक नहीं रुका। उन्होंने भारत पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा है। 27 अगस्त को यह टैरिफ लागू हुआ। ट्रंप ने इसे रूस-यूक्रेन युद्ध को फंड करने की सजा बताया। पिछले 100 दिन में उन्होंने 55 बार से ज्यादा भारत और मोदी का नाम लिया। कभी भारत की अर्थव्यवस्था को ‘मृत’ बताया, तो कभी मोदी को ‘अराजकता का फायदा उठाने वाला’ कहा। यह व्यवहार ऐसा है, जैसे कोई पुरानी दोस्ती को भूल न पा रहा हो। भारत ने टैरिफ को ‘अनुचित’ और ‘अन्यायी’ बताया। मोदी ने साफ कहा कि भारत अपने किसानों और हितों से समझौता नहीं करेगा।
ट्रंप-मोदी: दोस्ती से तकरार तक
पहले ट्रंप और मोदी के बीच गहरी दोस्ती थी। फरवरी 2025 में मोदी की व्हाइट हाउस यात्रा में दोनों ने एक-दूसरे की खूब तारीफ की। ट्रंप ने मोदी को ‘महान दोस्त’ कहा, और मोदी ने ट्रंप को ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का प्रतीक बताया। लेकिन अब ट्रंप का लहजा बदल गया है। जनवरी और जून 2025 में फोन पर बात हुई, लेकिन उनकी बेचैनी साफ दिखती है। सोशल मीडिया पर लोग ट्रंप के दावों का मजाक उड़ा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “ट्रंप मोदी को झुका नहीं सकते, भारत डटा रहेगा।”
क्या ट्रंप की मानसिक स्थिति ठीक नहीं?
ट्रंप की हरकतों से उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि उनमें नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के लक्षण हैं। 2017 की किताब ‘द डेंजरस केस ऑफ डोनाल्ड ट्रंप’ की लेखिका बांडी एक्स. ली ने उनमें खतरनाक व्यवहार देखा। साइकोलॉजी टुडे की रिपोर्ट में 27 विशेषज्ञों ने उनकी मानसिक स्थिति को अमेरिका के लिए खतरा बताया। ट्रंप को सोलिप्सिस्ट कहा जाता है, यानी वे खुद को दुनिया का केंद्र मानते हैं। भारत को ‘मृत अर्थव्यवस्था’ कहना उनकी हकीकत से दूरी दिखाता है। अगस्त 2025 में उनकी विचित्र बातें उनकी मानसिक तीक्ष्णता पर सवाल उठाती हैं। कुछ रिपोर्ट्स में उन्हें डिमेंशिया और नार्सिसिज्म से ग्रसित बताया गया।
भारत की उभरती ताकत
ट्रंप की बेचैनी भारत की बढ़ती ताकत को भी उजागर करती है। कभी अमेरिकी राष्ट्रपति भारतीय नेताओं को इंतजार करवाते थे। लेकिन अब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 2025 में भारत ने अमेरिका से 6.6 अरब डॉलर का तेल आयात किया, जो पिछले साल से 70% ज्यादा है। टैरिफ से भारत के 48.2 अरब डॉलर के निर्यात पर असर पड़ेगा, लेकिन भारत ने यूरोप और अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ाने की रणनीति बनाई। मोदी ने आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है।
पाकिस्तान और नया समीकरण
ट्रंप की नीतियां भारत-अमेरिका रिश्तों को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने पाकिस्तान से रिश्ते मजबूत किए। जून में पाकिस्तानी सेना प्रमुख से मुलाकात और तेल सौदे का ऐलान भारत को चिढ़ा रहा है। भारत कई बार पाकिस्तान से युद्ध लड़ चुका है। अब मोदी चीन और रूस की ओर देख सकते हैं, जैसा कि अगस्त 2025 में उनके संभावित दौरे से जाहिर है। ट्रंप का रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने का वादा अधूरा है, और भारत पर दबाव उनकी हताशा दिखाता है।ट्रंप की मानसिक स्थिति पर बहस तेज है। 200 से ज्यादा स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उन्हें ‘मैलिग्नेंट नार्सिसिज्म’ से पीड़ित बताया। वे एंटीसोशल और पैरानॉयड लक्षण दिखाते हैं। उनके समर्थकों में भी साइकोपैथी और नार्सिसिज्म के स्तर ज्यादा हैं। लेकिन ट्रंप इन आरोपों को खारिज करते हैं। उनकी नीतियां वैश्विक व्यापार को हिला रही हैं। भारत के लिए यह स्थिति हास्यास्पद और चिंताजनक है। ट्रंप की बेचैनी भारत की वैश्विक हैसियत को रेखांकित करती है, लेकिन यह रिश्तों को अस्थिर कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य रणनीति को नया आयाम दिया।ट्रंप का ‘भारत राग’ उनकी असुरक्षा और वैश्विक बदलावों का आईना है। भारत की उभरती ताकत उन्हें असहज कर रही है। मोदी की आत्मनिर्भरता की अपील भारत को मजबूत बनाएगी। लेकिन ट्रंप की अनियमितता से रिश्तों में दरार पड़ सकती है। क्या यह जुनून थमेगा, या नई चुनौतियां खड़ी होंगी? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल ट्रंप की हर बात में भारत और मोदी का नाम गूंज रहा है।
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