उत्तर प्रदेश चुनावी सरगर्मियों के बीच अपना दल एस ने नई टीम से बढ़ाई चुनावी पकड़

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपना दल एस ने संगठन को नए सिरे से मजबूत करना शुरू कर दिया है। नई टीम की नियुक्तियों से पार्टी पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में अपनी पकड़ बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। गठबंधन राजनीति में इसकी भूमिका और प्रभाव भी लगातार बढ़ रहा है।



उत्तर प्रदेश चुनावी सरगर्मियों के बीच अपना दल एस ने नई टीम से बढ़ाई चुनावी पकड़

ग्लोबल हिंदी न्यूज़ नेटवर्क

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल में गर्मी लगातार बढ़ रही है। विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारियों की शुरुआत पहले ही हो चुकी है। प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दल अपनी-अपनी रणनीतियों को तेज कर रहे हैं और ऐसे समय में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी अपना दल सोनेलाल ने अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी बनाकर चुनावी संदेश साफ कर दिया है कि पार्टी इस बार पहले से भी अधिक मजबूत तैयारी के साथ मैदान में उतरने जा रही है। पार्टी की नई टीम में नौ नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिनमें दो उपाध्यक्ष, तीन महासचिव और चार सचिव शामिल हैं। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पार्टी ने 2022 में 12 सीटें जीतकर खुद को यूपी की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित किया था।बीते शनिवार को जारी सूची में मिर्जापुर के अनिल सिंह परसिया को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। पूर्वांचल में मिर्जापुर, भदोही और आसपास के जिलों में अपना दल एस का प्रभाव लगातार बढ़ा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने मिर्जापुर की तीनों सीटों में से दो पर जीत हासिल की थी। यही वजह है कि इस क्षेत्र से संगठन में महत्वपूर्ण पद देना पार्टी की रणनीति के लिहाज से उचित माना जा रहा है। इसके अलावा बस्ती के राम सिंह पटेल को उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने संतकबीरनगर, बस्ती और सिद्धार्थनगर बेल्ट में अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया है।

पार्टी ने देवरिया के अरविंद पटेल, प्रयागराज के दुर्गा प्रसाद पटेल और लखनऊ की शिखा सिंह को प्रदेश महासचिव बनाया है। देवरिया और पूर्वांचल के आसपास के जिलों में पार्टी का सामाजिक आधार लगातार बढ़ रहा है। 2017 में जहां अपना दल एस का वोट प्रतिशत 2.3 प्रतिशत था, वहीं 2022 में बढ़कर लगभग 3.1 प्रतिशत पहुंच गया। यह आंकड़ा छोटा जरूर लगता है, लेकिन पार्टी जिन चुनिंदा सीटों पर दावेदारी करती है, वहां उसका वोट आधार आमतौर पर 18 से 28 प्रतिशत के बीच रहता है। इस आधार को बढ़ाने के लिए महासचिव स्तर पर अनुभव और क्षेत्रीय पकड़ दोनों आवश्यक हैं, जो इस नई टीम में दिखाई देते हैं।पार्टी ने चार नए प्रदेश सचिव भी नियुक्त किए हैं, जिनमें प्रयागराज के रवि नंदन यादव, बहराइच के ओम प्रकाश पटेल, बलरामपुर के शिव कुमार और जौनपुर के सुनील पटेल शामिल हैं। तराई और अवध क्षेत्र में पिछली बार पार्टी ने खास उपस्थिति दर्ज कराई थी। बहराइच, बलरामपुर, गोंडा और श्रावस्ती की कई सीटों पर पार्टी को 2022 में औसतन 20 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे। इन जिलों से सचिव पदों पर जिम्मेदारी देना स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी इस क्षेत्र को अपने विस्तार का नया आधार बनाना चाहती है।

प्रदेश अध्यक्ष जाटव आरपी गौतम ने नई सूची जारी करते हुए कहा कि यह टीम आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा। पिछली बार 17 सीटों पर चुनाव लड़कर 12 जीतना कोई छोटा आंकड़ा नहीं था। आकड़ों के अनुसार 2022 में अपना दल एस ने बसपा (जो 1 सीट पर सिमट गई थी) और कांग्रेस (जो दो सीटों तक सीमित रही) दोनों को पीछे छोड़ते हुए तीसरा स्थान हासिल किया था। यह उपलब्धि पार्टी की तेजी से मजबूत होती पकड़ को दिखाती है।यदि 2022 के आंकड़ों को देखा जाए तो पार्टी ने जिन 12 सीटों पर जीत दर्ज की, उनमें से सात सीटों पर उसकी जीत का अंतर 10 हजार से अधिक वोटों का था। मिर्जापुर की छानबे सीट पर पार्टी को करीब 34 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं प्रतापगढ़ में परिणाम खासा चौंकाने वाला रहा, जहां पार्टी उम्मीदवार ने 40 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए। यही कारण है कि पार्टी अब उन जिलों पर अधिक ध्यान दे रही है जहां 2022 में वह दूसरे स्थान पर रही थी। आंकड़ों के अनुसार करीब 18 सीटों पर पार्टी ऐसे मुकाबले में रही जहां जीत की संभावना बेहद करीब थी। इसी आधार पर नई कार्यकारिणी में उन्हीं जिलों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया गया है।

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल पिछले कई महीनों से लगातार संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। मिर्जापुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, बहराइच और देवरिया में उन्होंने कई दौर की बैठकें की हैं। सूत्रों के अनुसार इन बैठकों में बूथ प्रबंधन, पन्ना प्रमुख, सोशल समीकरण, क्षेत्रवार मुद्दों और बीजेपी के साथ समन्वय जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई है। उनका प्रयास है कि पार्टी का संगठन केवल चुनावी समय पर सक्रिय न रहे, बल्कि पूरे साल जमीन पर मजबूती से काम करता रहे।अपना दल एस का मुख्य वोट आधार कुर्मी और पटेल समाज है, जो लगभग 7 से 8 प्रतिशत आबादी रखते हैं। यही सामाजिक आधार कई जिलों में पार्टी के लिए निर्णायक भूमिका निभाता है। बीजेपी के साथ गठबंधन से यह आधार और मजबूत हुआ है। 2014 से लेकर 2024 तक हर चुनाव में पार्टी ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया है। लोकसभा की बात करें तो मिर्जापुर और रोबर्ट्सगंज सीटों पर लगातार जीत इस बात का संकेत है कि संगठन केवल विधानसभा ही नहीं, बल्कि संसदीय स्तर पर भी प्रभाव रखता है।

नई कार्यकारिणी के आने के बाद संगठन अब अगले चरण की तैयारियों में लगेगा। बूथ समितियों का पुनर्गठन, शक्ति केंद्रों की समीक्षा, मंडल और जिला स्तरीय बैठकों को गति देना, प्रमुख गांवों में पंचायत स्तर पर संवाद शुरू करना और सोशल मीडिया पर संगठन को सक्रिय करना ये सभी काम अगले महीनों में तेज होंगे। पार्टी का लक्ष्य है कि 2022 की तरह इस बार भी बीजेपी गठबंधन में अपनी भूमिका मजबूत रखी जाए और सीटों की संख्या को 12 से बढ़ाकर कम से कम 15 से 18 तक ले जाया जाए।उत्तर प्रदेश की राजनीति में जहां बड़े दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वहीं अपना दल एस ने यह साफ कर दिया है कि वह भी मैदान में कदम रखने को तैयार है। नई कार्यकारिणी से यह संकेत मिलता है कि पार्टी अपने मजबूत क्षेत्रों को और मजबूत करने और कमजोर क्षेत्रों में नए प्रयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। चुनाव अभी दूर हैं लेकिन संगठनात्मक स्तर पर जो बदलाव शुरू हो चुके हैं, वह यह दिखाते हैं कि आने वाले महीनों में अपना दल एस चुनावी माहौल को लेकर पूरी तैयारी के साथ सक्रिय रहेगा।

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