Mann Ki Baat: मन की बात में मोदी ने भारत की प्रगति, परंपरा और नए आत्मविश्वास की कथा सुनाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 128वें एपिसोड में भारत की प्रगति, विज्ञान, कृषि उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत, भूटान यात्रा, INS माहे, काशी–तमिल संगमम और युवाओं की नवाचार क्षमता पर गहराई से बात की। कार्यक्रम में इतिहास, परंपरा और नए भारत के आत्मविश्वास का भावपूर्ण चित्र उभरकर आया।




Mann Ki Baat: मन की बात में मोदी ने भारत की प्रगति, परंपरा और नए आत्मविश्वास की कथा सुनाई

ग्लोबल हिंदी न्यूज़ नेटवर्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 128वें एपिसोड में जो बातें देश के सामने रखीं, वे केवल घटनाओं का क्रम नहीं थीं, बल्कि देश की बदलती मानसिकता, नई संभावनाओं और भारत के भीतर उभर रही आत्मविश्वास की वह लहर थीं, जो समाज के हर कोने में नई ऊर्जा जगाती है। उनकी आवाज़ में वही सहजता और अपनापन था, जिसने मन की बात को महज एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के दिलों की धड़कनों से जोड़ देने वाला सेतु बना दिया है।मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत भूटान यात्रा से जुड़े अनुभवों से की। उन्होंने बताया कि वहाँ के लोग भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भेजे जाने के लिए भारत के प्रति गहरा आभार व्यक्त कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सुनकर उनका मन गर्व से भर उठा। कुछ ही हफ्ते पहले भारत ने ये अवशेष रूस के काल्मिकिया क्षेत्र में भी भेजे थे, जहाँ बौद्ध धर्म की विशेष उपस्थिति है। बताया गया कि अवशेषों के दर्शन के लिए दूर–दूर से लोग पहुँचे थे। यह केवल सांस्कृतिक आदान–प्रदान नहीं, बल्कि भारत की उस आध्यात्मिक धरोहर की जीवंत गवाही है, जो सीमाओं से परे मानवता को जोड़ती है।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के विंटर टूरिज्म का जिक्र किया, जो इन दिनों नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। उन्होंने बताया कि अब औली, चोपटा, देयारा और मुनस्यारी जैसी जगहें सिर्फ यात्रियों का नहीं, बल्कि रोमांच के प्रेमियों का केंद्र बन चुकी हैं। पिथौरागढ़ जिले के आदि कैलाश क्षेत्र में 14,500 फुट की ऊंचाई पर हाई-एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन आयोजित की गई, जिसमें 18 राज्यों के 750 से अधिक एथलीटों ने हिस्सा लिया। इतनी ऊंचाई पर, इतनी कठिन परिस्थितियों में जब देश के युवा भाग लेते हैं, तो यह उनके धैर्य, फिटनेस और मानसिक संबल का बड़ा प्रमाण है। उत्तराखंड अब पर्यटन का नया चेहरा बनकर देश की आर्थिक धड़कन में नई गति जोड़ रहा है।प्रधानमंत्री ने मुंबई में भारतीय नौसेना में शामिल किए गए INS ‘माहे’ का भी उल्लेख किया। लोगों में इसके स्वदेशी डिज़ाइन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। पुडुचेरी और मालाबार तट के लोग इस नाम के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से भी इसे भावनात्मक रूप से जुड़ा मान रहे हैं। ‘माहे’ का नौसेना में शामिल होना भारत की समुद्री शक्ति, तकनीकी कौशल और स्वदेशी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह एक याद दिलाता है कि तकनीक जितनी आधुनिक हो, उसमें अपनी मिट्टी की खुशबू भी होनी चाहिए।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने काशी–तमिल संगमम का उल्लेख किया, जो 2 दिसंबर से नमो घाट पर शुरू हो रहा है। इसकी थीम इस बार है “लर्न तमिल, तमिल करकलम।” प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी–तमिल संगमम उत्तर और दक्षिण भारत के बीच मौजूद सदियों पुराने सांस्कृतिक सेतु का आधुनिक रूप है। यह कार्यक्रम न केवल दो भाषाओं, दो सभ्यताओं और दो परंपराओं को जोड़ता है, बल्कि यह भारत की विविधता में एकता की अवधारणा का शानदार उदाहरण है। उन्होंने देशवासियों से इस कार्यक्रम में भाग लेने की अपील भी की।इसके बाद एक ऐतिहासिक प्रसंग सामने आया, जिसने लोगों के मन में भारत की मानवीय परंपरा का गौरव फिर से जगाया। प्रधानमंत्री ने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के समय गुजरात के नवानगर के महाराजा दिग्विजय सिंह ने कैसे हजारों पोलिश यहूदी बच्चों को आश्रय दिया था। उन्होंने न गठबंधन सोचा, न रणनीति; बस मानवता की पुकार सुनी। उन्होंने उन बच्चों के लिए स्कूल, भोजन, आवास और सुरक्षा का इंतजाम किया। आज वे बच्चे, जो अब वृद्ध हो चुके हैं, उनकी अगली पीढ़ियाँ तक जाम साहब को सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करती हैं। यह कहानी याद दिलाती है कि भारत की असली शक्ति उसकी करुणा है।

प्रधानमंत्री ने फिर कुरुक्षेत्र का उल्लेख किया जहाँ महाभारत का महायुद्ध हुआ था। उन्होंने बताया कि अब वहाँ ‘महाभारत अनुभव केंद्र’ बनाया गया है, जहाँ 3D प्रस्तुति, लाइट एंड साउंड और डिजिटल तकनीक के माध्यम से महाभारत की कथाएँ जीवंत रूप में दिखाई जाती हैं। यह केंद्र भारत के इतिहास, आध्यात्मिकता और ज्ञान की विरासत को नए तरीके से समझने का माध्यम बन रहा है। आने वाली पीढ़ियाँ यहाँ सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि उस काल के अनुभव को महसूस कर सकेंगी।प्रधानमंत्री ने इस बार शहद उत्पादन के विषय को भी विशेष स्थान दिया। उन्होंने जम्मू–कश्मीर के रामबन जिले के ‘सुलाई’ शहद का जिक्र किया, जिसे GI टैग मिल चुका है। यह सफेद रंग का दुर्लभ शहद है, जो वन–तुलसी के फूलों से बनता है। दक्षिण कन्नड़ के पुत्तुर क्षेत्र में ‘ग्रामजन्य’ संस्था द्वारा शहद उत्पादन को नई दिशा दी जा रही है। वहीं कर्नाटक के तुमकुरु जिले में ‘शिवगंगा कालंजिया’ संस्था किसानों को दो–दो मधुमक्खी बक्से देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही है। नागालैंड के चोखलांगन गाँव का उल्लेख सबसे अनूठा था जहाँ मधुमक्खियाँ पेड़ों पर नहीं, बल्कि ऊंची चट्टानों पर अपना घर बनाती हैं। वहाँ के लोग उनसे पहले ‘अनुमति’ लेकर शहद इकट्ठा करते हैं। प्रकृति के प्रति यह सम्मान भारत के आदिवासी समाज की अनूठी सांस्कृतिक धरोहर है।

विज्ञान और युवा शक्ति की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने पुणे के छात्रों की ड्रोन प्रतियोगिता का उदाहरण दिया। मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की चुनौती छात्रों ने स्वीकार की। कई बार ड्रोन गिरा, टूटा, लेकिन युवाओं ने हार नहीं मानी। आखिरकार वह मंगल–जैसे वातावरण में उड़ने में सफल रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देश के युवाओं की जिजीविषा, संघर्ष और बड़े सपनों का प्रमाण है। भारत आज विज्ञान में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है।अंत में प्रधानमंत्री ने नवंबर महीने के विशेष कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया संविधान दिवस से लेकर वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ तक, अयोध्या में राम मंदिर पर धर्मध्वजा आरोहण से लेकर कुरुक्षेत्र में पांचजन्य स्मारक के लोकार्पण तक। उन्होंने कहा कि भारत आज परंपरा और आधुनिकता के मेल से एक नए युग की ओर बढ़ रहा है। मन की बात का यह एपिसोड गहराई से संदेश देता है कि आज भारत अपने अतीत को संजोते हुए भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है। एक ओर विज्ञान है, दूसरी ओर अध्यात्म; एक ओर तकनीक है, दूसरी ओर संस्कृति; एक ओर गति है, दूसरी ओर गहराई। यही नया भारत है जो बदल भी रहा है और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की ताकत भी रखता है।

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